इंटरनेट पर मिलेंगी 32 हजार दुर्लभ पांडुलिपियां, एक करोड़ प्राचीन अभिलेख और हस्तलिपियों का होगा कायाकल्प
इंटरनेट पर मिलेंगी 32 हजार दुर्लभ पांडुलिपियां, एक करोड़ प्राचीन अभिलेख और हस्तलिपियों का होगा कायाकल्प
राष्ट्रीय अभिलेख पोर्टल में पहला स्थान, एक करोड़ प्राचीन अभिलेख और हस्तलिपियों का होगा कायाकल्प
अभिलेखों का डिजिटलाइजेशन पूरा हो गया है। इसके बाद शीघ्र ही इनका पोर्टल तैयार होगा, जिसे राष्ट्रीय अभिलेख पोर्टल के साथ पहले चरण में स्थान मिलेगा। हिमाचल प्रदेश राज्य अभिलेखागार विंग भाषा एवं संस्कृति विभाग ने प्रदेश के 32 हजार दुर्लभ डाक्यूमेंट का संग्रह अब तक कर लिया है, जिसमें रियासतकालीन से लेकर पांडुलिपियां भी यहां संरक्षित रखी गई हैं। यह जानकारी शुक्रवार को सहायक निदेशक राज्य अभिलेखागार शिमला मोहन ठाकुर ने नाहन में आयोजित हिमाचली लोक कला के पुरोधा रहे स्वर्गीय लाल चंद प्रार्थी की 110वीं जयंती अवसर पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान दी। सहायक निदेशक मोहन ठाकुर ने बताया कि सिरमौर में राज्य स्तरीय जयंती समारोह में लगी प्रदर्शनी में 50 दुर्लभ शोध पत्र अथवा डाक्यूमेंट को प्रर्दशनी के लिए रखा गया है।
बता दें कि भारत की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल युग में सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के रूप में एक महाअभियान का शंखनाद किया है। इस मिशन के तहत देशभर के कोने-कोने से लगभग एक करोड़ दुर्लभ पांडुलिपियों, प्राचीन अभिलेखों और हस्तलिपियों का डिजिटाइजेशन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में भाषा एवं संस्कृति विभाग ने इस दिशा में सक्रियता बढ़ा दी है, ताकि अनमोल दस्तावेजों को संरक्षित किया जा सके।
75 साल पुराने दस्तावेज होंगे शामिल
इस मिशन के दायरे में वे सभी हस्तलिखित पांडुलिपियां, ताड़पत्र या भोजपत्र आएंगे, जो कम से कम 75 वर्ष पुराने हैं। मिशन के तहत उन ऐतिहासिक सामग्रियों को प्राथमिकता दी जा रही है जो समय की मार झेल रही हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि डिजिटाइजेशन के बाद भी पांडुलिपियां उनके असली मालिकों के पास ही रहेंगी। यदि कोई प्राचीन दस्तावेज खराब स्थिति में है, तो राज्य संग्रहालय शिमला द्वारा विशेषज्ञों के माध्यम से उसका कैमिकल ट्रीटमेंट और वैज्ञानिक संरक्षण भी किया जाएगा।
विभाग ने आम जनता, निजी पुस्तकालयों और धार्मिक संस्थानों से आग्रह किया है कि वे अपनी इन अनमोल धरोहरों को इस मिशन के माध्यम से पंजीकृत करवाएं। यह न केवल पूर्वजों की विरासत को बचाने का माध्यम है, बल्कि भारतीय संस्कृति के खजाने को वैश्विक पहचान दिलाने में एक योगदान होगा।
‘ज्ञान भारतम ऐप’ मिशन से जुडऩे के लिए सरकार ने विशेष रूप से ‘ज्ञान भारतम ऐप’ लॉन्च की है। स्टेप 1-मोबाइल फोन पर ज्ञान भारतम ऐप डाउनलोड कर लॉगिन करें, पांडुलिपि के कवर पेज और अंदर के दो-तीन पन्नों की फोटो अपलोड करें, फोटो अपलोड होते ही मिशन की टीम डेटा का विश्लेषण करेगी और आगामी प्रक्रिया के लिए सीधे मालिक से संपर्क करेगी।

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