जिला लखीमपुर खीरी में बड़े स्कूलों की पुस्तक और ड्रेस मिलती है उनके ही दुकानदारों पर- शासन का आदेश उनके लिए कोई मायने नहीं रखता
जिला लखीमपुर खीरी में बड़े स्कूलों की पुस्तक और ड्रेस मिलती है उनके ही दुकानदारों पर- शासन का आदेश उनके लिए कोई मायने नहीं रखता
जिला लखीमपुर खीरी में भी स्कूलों की मनमानी रुक नहीं रही है लगभग हर स्कूल के अपने किताब बेचने वाली दुकानदार है जिसमें स्कूलों को तो कमीशन मिलता ही मिलता है साथ में दुकानदार भी मोटा मुनाफा कमाता है और इसमें जो किताबें छपते हैं अर्थात जो प्रकाशक है वह भी बहुत ज्यादा मोटा मुनाफा कमाते सोने का विषय यह है एक किताब के अंदर प्रिंटिंग कितनी महंगी होगी उसके पन्ने कितने महंगे होंगे जो एक-एक किताब के दाम 500/ ₹600 रख दिए जाते हैं उदाहरण के लिए लखीमपुर खीरी के निजी स्कूल का एक पर्चा दे रहे हैं
आप देखें कि वहां पर किताबें और कॉपी और किस कदर महंगी है प्रशासन कितना ही जोर लगा ले लेकिन इन स्कूलों के तंत्र पर लगाम लगाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है
बच्चों की ड्रेस भी अब स्कूलों की चुनी हुई दुकानों पर ही मिलती है, यह जांच का विषय है और इससे विषय में प्रशासन को पहल करनी ही चाहिए क्योंकि यहां पर लखीमपुर खीरी के जितने भी महंगे विद्यालय हैं उनकी पुस्तक और उनकी ड्रेस उनके स्कूलों के चुने हुए दुकानों पर ही मिलती है

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