उत्तर प्रदेश में जबरन प्रीपेड मीटर लगाए जाने के खिलाफ उपभोक्ता परिषद राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने के लिए बिजली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही हेतु देश के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर व ऊर्जा सचिव भारत सरकार को भेजा प्रस्ताव।

उत्तर प्रदेश में जबरन प्रीपेड मीटर लगाए जाने के खिलाफ उपभोक्ता परिषद राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने के लिए बिजली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही हेतु देश के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर व ऊर्जा सचिव भारत सरकार को भेजा प्रस्ताव।



लखनऊ।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना बड़े पैमाने पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष   व    देश की ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी संवैधानिक सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी(सी0ई0आर0सी )के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा  आज देश के ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर व केंद्रीय ऊर्जा सचिव को एक प्रस्ताव भेजने हुए ने कहा कि यह कार्यवाही विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें प्रीपेड मीटर को उपभोक्ता की इच्छा पर आधारित वैकल्पिक व्यवस्था बताया गया है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए उत्तर प्रदेश में संसदीय परंपरा का उल्लंघन हो रहा है।


उत्तर प्रदेश राज विद्युत उपभोक्ता परिषद ने अपने प्रस्ताव में कहा परिषद के अनुसार, प्रदेश  के अंतर्गत आरडीएसएस योजना में लगभग 3.8 करोड़ उपभोक्ताओं के मीटर बदले जा रहे हैं, जिनमें से लगभग 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना उनकी सहमति के प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, नए विद्युत कनेक्शन भी अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं, जो कि राष्ट्रीय कानून  की मंशा के विपरीत है।


श्री वर्मा ने बताया कि दिनांक 2 अप्रैल 2026 को संसद में स्पष्ट किया गया है कि प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की मांग पर ही लगाए जा सकते हैं और यह पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था है। इसके बावजूद प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियां इस प्रावधान की अनदेखी करते हुए उपभोक्ताओं पर प्रीपेड प्रणाली थोप रही हैं।


इस मुद्दे को लेकर प्रदेश के लगभग 3.85 करोड़ उपभोक्ताओं में भारी असंतोष है। वाराणसी सहित कई क्षेत्रों में उपभोक्ता विरोध  कर रहे हैं। परिषद द्वारा इस विषय को पहले भी ऊर्जा मंत्रालय के संज्ञान में लाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।


उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भारत सरकार से निम्न मांगें की हैं—


पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

जिन उपभोक्ताओं के मीटर बिना सहमति के प्रीपेड किए गए हैं, उन्हें तत्काल पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए।

नए कनेक्शनों में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त की जाए।

दोषी अधिकारियों एवं संबंधित कंपनियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी जारी रही तो प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा।

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