शराब की लत से मुक्ति संभव है, लेकिन इसके लिए बहुआयामी प्रयास जरूरी हैं-स्माइल नशा मुक्ति केन्द्र
किसी भी प्रकार के नशे का सेवन मानव सभ्यता के साथ सदियों से जुड़ा हुआ है, लेकिन आज के समय में यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानसिक समस्या बन चुकी है।
विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देश में, शराब एवं अन्य नशों की लत और उसकी विषाक्तता न केवल व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से नष्ट करती है, बल्कि परिवार और समाज को भी खोखला कर देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, नशे के कारण विश्व भर में लाखों मौतें होती हैं, और भारत में भी नशे से संबंधित मौतें और बीमारियाँ बढ़ रही हैं। भारत में नशे की खपत तेजी से बढ़ रही है – 2024 में कुल शराब एवं अन्य नशे की बिक्री 408 मिलियन से अधिक हो गई, और यह एक बड़ी चुनौती है।
सबसे ज़्यादा खुले आम बिकने वाला नशा शराब है, शराब (एथेनॉल) एक विषैला पदार्थ है जो शरीर में प्रवेश करने पर लीवर द्वारा मेटाबोलाइज होता है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह तीव्र विषाक्तता (अल्कोहल पॉइजनिंग) का कारण बनता है, जिसमें सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी, उल्टी और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। लंबे समय तक सेवन से क्रोनिक विषाक्तता होती है, जो लीवर सिरोसिस, हृदय रोग, कैंसर (मुंह, गला, लीवर), मस्तिष्क क्षति और मधुमेह जैसी बीमारियों का कारण बनती है। भारत में शराब से जुड़ी बीमारियों से हर साल हजारों मौतें होती हैं, और यह सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है – लगभग 40% दुर्घटनाएँ शराब के नशे में होती हैं, शराब की लत (अल्कोहल यूज डिसऑर्डर) एक मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति शराब के बिना रह नहीं पाता। भारत में पुरुषों में शराब का सेवन अधिक है – NFHS सर्वे के अनुसार, वयस्क पुरुषों में 20-30% शराब पीते हैं, जबकि महिलाओं में यह कम है। लेकिन हाल के वर्षों में कुल खपत बढ़ रही है। कई अध्ययनों में पाया गया कि पीने वालों में 15-30% लोगों में खतरनाक या हानिकारक पीने की आदत है, और 3-15% में पूर्ण लत विकसित हो जाती है। युवाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, जहां तनाव, दिखावा या साथियों का दबाव मुख्य कारण हैं , शराब की लत समाज के लिए एक बड़ा अभिशाप है, नशे में व्यक्ति घरेलू हिंसा करता है, बच्चों और पत्नी की उपेक्षा करता है। परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाता है क्योंकि आय का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च होता है। भारत में शराब से होने वाली हानि (स्वास्थ्य, दुर्घटनाएँ, उत्पादकता हानि) राजस्व से कई गुना अधिक है। कई परिवार गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं। नशे में अपराध, बलात्कार, मारपीट और सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ती हैं। समाज में कलंक और stigma के कारण लती व्यक्ति मदद नहीं ले पाते। अस्पतालों में शराब से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव डालती है।
पार्टी कल्चर और दिखावे के लिए युवा शराब की ओर आकर्षित होते हैं।कई राज्यों में शराब सस्ती और आसानी से मिलती है।लोग शराब के दीर्घकालिक नुकसान से अनजान हैं।काम का दबाव या अवसाद से राहत के लिए शराब का सहारा लिया जाता है।
शराब की लत से मुक्ति संभव है, लेकिन इसके लिए बहुआयामी प्रयास जरूरी हैं:
सरकारी नीतियाँ शराब पर कर बढ़ाना, बिक्री पर प्रतिबंध और नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाना।
परिवार और समाज की भूमिकबलती व्यक्ति को कलंकित न करें, बल्कि सहायता दें। योग, व्यायाम और काउंसलिंग से मदद मिल सकती है।
नशा मुक्ति केंद्र भी एक बहुत बढ़िया उपाय हो सकता है, भारत में कई केंद्र हैं जहां दवा, काउंसलिंग और रिहैबिलिटेशन से लत छुड़ाई जाती है।इच्छाशक्ति से शराब छोड़ें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ।
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