दिल्ली विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में प्रशासन का कर्मचारियों के साथ दमनकारी रवैया..
दिल्ली विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में प्रशासन का कर्मचारियों के साथ दमनकारी रवैया..
मैं सुदेश दिल्ली विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन में स्पेशल अतिथि हूँ! बड़े दुख के साथ इस समाचार पत्र के माध्यम से अवगत कराना जरूरी है कि एक नामचीन शैक्षणिक संस्थान दिल्ली विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की क्या हालत है! गोविंद सिंह दौलत राम कॉलेज में वर्ष 2001 से अनुकंपा के आधार पर नियमित कर्मचारी के रूप में लाइब्रेरी में काम कर रहा है। कॉलेज प्रिंसिपल प्रोफेसर सविता रॉय ने गोविंद सिंह को अक्टूबर 2025 से सैलरी देना बंद कर दिया है और कारण यह बता रही है कि उनकी यूजीसी से अप्रूवल नहीं है! बड़े अफसोस की बात है कि 25 वर्ष तक किसी को याद नहीं आया के इस पद के लिए यूजीसी से अनुमति लेना है! 25 वर्ष बाद प्रिंसिपल ने यूजीसी को अनुमति के लिए पत्र लिखा है! आज की डेट में जब गोविंद सिंह को कार्य करते हुए लगभग 25 वर्ष हो गए हैं तब यह लिख कर देना कि जब तक यूजीसी आपके रेगुलराइजेशन को क्लियर नहीं करेगी तब तक कॉलेज आपको सैलरी नहीं देगा।यह कॉलेज प्रिंसिपल और कॉलेज के चेयरमैन की तानाशाही का परिचायक है कॉलेज की यूनियन अक्टूबर माह से ही इसका विरोध कर रही है लेकिन कॉलेज प्रिंसिपल अपनी तानाशाही और यूनिवर्सिटी अधिकारियों के मिली भगत के कारण उनकी बातों पर संज्ञान नहीं ले रही है। 27 जनवरी 2026 के बाद DUCKU ने इस पर पूर्ण संज्ञान लेते हुए प्राचार्य से बातचीत से इस विषय को सुलझाने की कोशिश की परंतु प्राचार्य के अडियल रवैये के कारण कॉलेज कर्मचारियों को धरने पर बैठना पड़ा ! इतना ही नही 23 फरवरी 2026 प्रिंसिपल ने कॉलेज का गेट अंदर से बंद करा दिया और ताला लगवा दिया क्योंकि धरने पर कर्मचारी यूनियन के एग्जीक्यूटिव,वर्किंग कमेटी और स्पेशल अतिथि सदस्य भी बैठे है! इसी दौरान दौलत राम कॉलेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान दौलत सिंह रावत और सचिव अमित जमवाल दिनाक 24/2/2026 को कॉलेज प्रिंसिपल ने प्रधान और सचिव दोनों को अपनी तानाशाही दिखाते हुए नौकरी से बर्खास्त कर दिया ! जबकि इस सारे प्रकरण में अगर कोई दोषी है तो कॉलेज की प्रिंसिपल है क्योंकि यूजीसी से अनुमति का कार्य कर्मचारियों का नहीं होता यह प्रशासनिक कार्य है इस कार्य में 25 वर्ष क्यो लगे? इसकी जवाबदेही कॉलेज प्रिंसिपल की है इसकी सजा गोविंद को क्यों? अपने काले कारनामों को छुपाने के लिए प्रिंसिपल मैडम नए-नए हथ कंडे अपना रही है। क्योंकि कॉलेज में जो नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां हुई है जिसमे दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन संलिप्त है! इस भ्रष्ट तानाशाह प्रशासन के खिलाफ डूक्कू अध्यक्ष
देवेंद्र शर्मा और रविन्द्र कुमार पांडे महासचिव के नेतृत्व में समस्त कर्मचारी
DUCKU के आह्वान पर लंबे समय से धरने पर बैठे हैं परंतु दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन एवं कॉलेज पर शासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन एवं दौलत राम कॉलेज प्रिंसिपल के तानाशाही रवैये के कारण आज एक परिवार सड़क पर उतरने को मजबूर है अगर इस बीच गोविंद जी एवं दौलत सिंह और अमित जमवाल के परिवार में कोई भी अनहोनी होती है उसकी पूरी जिम्मेदारी दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी! सोचने का विषय है कि 5 महीने से गोविंद जी का परिवार कैसे पल रहा होगा ! जहाँ दिल्ली जैसे शहर में एक सुई तक भी फ्री नहीं मिलती वहां गोविंद जी अपने बच्चों के लिए जगह-जगह हाथ फैला कर कैसे बच्चों का पेट पाल रहे होंगे! अगर एक शैक्षणिक संस्थान में इस तरह का कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार है तो फिर शिक्षित होने का और शिक्षा का महत्व क्या?


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